जल है तो कल है – परीक्षा केंद्र – दहावीचे विद्यार्थी

पानी की बचत करने की आदत अपनी जीवन शैली में अपनाएं, यही जीवन को सुरक्षित रखने की तरफ हमारा पहला कदम होगा।
“जल है तो कल है।”
मनुष्य ने प्रकृति के साथ इतना खिलवाड़ किया है कि प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के कारण प्राकृतिक संपदाएं अथाह होते हुए भी घटने लगी है। सभी जानते है कि हमें हवा के पश्चात सबसे ज्यादा जरूरत पानी की होती है। हमारे आहार में 70 प्रतिशत भाग पानी का होता है फिर भी क्या कारण है कि हर घर में हर क्षेत्र में पानी का दुरुपयोग देखने को मिल जायेगा।
पानी का दुरूपयोग वर्षो से हो रहा है और हैरानी की बात है कि बढ़ता ही जा रहा है। प्रश् उठता है कि क्या हम आने वाली पीढ़ियों को पानी रूपी अमृत से वंचित रखना चाहते हैं? क्या हम चाहते हैं कि वे पानी की कमी के लिए हमें दोषी ठहराएं ।
मुझे याद है कि बचपन में मेरी दादी कपड़े धोने से निकले हुए पानी को पौंछा लगाने के काम में, दाल-चावल व सब्जियां धोने से निकलने वाले पानी को पौधों में डालने के काम में लिया करती थी। हमारे घर में पानी का दुरूपयोग सर्वथा वर्जित था। आज ऐसे जीवन मूल्य दुर्लभ होते जा रहे हैं। हर बाथरूम में लगा हुआ बाथ-टब, खुले नलों के नीचे धुलते कपड़े और बरतन धोते या नहाते समय फव्वारें का इस्तेमाल आदि में पानी का जमकर प्रयोग होता है। आने वाले समय में पानी कोई दुर्लभ वस्तु न बन जाए, इसके लिए हमें आज से ही सावधान रहना होगा ताकि पानी की हर कीमती बूंद को बचाया जा सके और आने वाली पीढ़ी को पानी की कमी के लिए हमें उत्तरदायी ना ठहराएं, यही उपयुक्त होगा।
पानी जीवन की पहली शर्त है। अत: पानी की बचत करने की आदत अपनी जीवन शैली में अपनाएं, यही जीवन को सुरक्षित रखने की तरफ हमारा पहला कदम होगा। इसके साथ ही हमें बरसात के पानी को उपयोग में लाने के तरीकों को भी अपनाना होगा ताकि उसकी हर बूंद का सदुपयोग हो सके।
पानी का सही इस्तेमाल ही हमें सुखद जीवन दे सकता है।

date: – १५/३/२०१६ परीक्षा केंद्र इस्लामपूर हायस्कूल

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